राजस्थान झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत, शिक्षा मंत्री ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश, डोटासरा बोले – यह हादसा नहीं, हत्या है

Jhalawar 25 जुलाई 2025

राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। भारी बारिश के चलते एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय की जर्जर छत अचानक ढह गई, जिससे कई बच्चे मलबे में दब गए। इस भयावह हादसे में अब तक 7 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 17 से 30 बच्चे गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

हादसे के तुरंत बाद गांववालों, स्कूल स्टाफ और पुलिस ने मिलकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। JCB मशीनों की मदद से मलबा हटाया गया और घायलों को मनोहरथाना अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें से 11 बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है। प्रशासन की ओर से राहत कार्यों को तेज़ी से अंजाम दिया जा रहा है।

शिक्षा मंत्री ने दिए जांच के आदेश

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घटना को बेहद दुखद बताया और कहा, “यह हादसा अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। तीन बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। बाकी घायल बच्चों का इलाज जारी है। सभी का इलाज सरकारी खर्चे पर किया जाएगा। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। आखिर यह हादसा क्यों हुआ, इसकी पूरी पड़ताल की जाएगी।”

CM जताया शोक

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “झालावाड़ के पिपलोदी में स्कूल की छत गिरने से हुआ हादसा अत्यंत हृदयविदारक है। घायल बच्चों के उचित इलाज के निर्देश दिए गए हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करें।”

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “झालावाड़ के मनोहर थाना क्षेत्र में सरकारी स्कूल की छत गिरने से बच्चों और शिक्षकों की मौत की खबर अत्यंत दुखद है। ईश्वर से प्रार्थना है कि जान का कम से कम नुकसान हो और घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिले।”

PCC ने सरकार पर साधा निशाना

पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “झालावाड़ के मनोहर थाना क्षेत्र में जो हादसा हुआ है, वह मात्र एक दुर्घटना नहीं बल्कि सरकार की आपराधिक लापरवाही का परिणाम है — यह हत्या है।”

उन्होंने सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए कहा, “बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जर्जर स्कूल भवनों की अनदेखी क्यों की गई? स्कूलों के मरम्मत के लिए बजट क्यों नहीं जारी किया गया? क्या मंत्रियों के बंगलों की मरम्मत ज़रूरी है और बच्चों की सुरक्षा नहीं? क्या भाजपा सरकार शिक्षा बजट को बोझ मानती है और बच्चों की जान की कीमत नहीं समझती?”

डोटासरा ने माँग की कि दोषियों को सख्त सजा दी जाए और सभी जर्जर स्कूलों की तुरंत मरम्मत कराई जाए।

इस हृदयविदारक घटना ने राज्यभर में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर कब तक मासूम बच्चों की जानें इस तरह की लापरवाहियों की भेंट चढ़ती रहेंगी?