जयपुर के रामगढ़ बांध इलाके में मंगलवार को सरकार और एक प्राइवेट कंपनी की साझेदारी से ड्रोन के जरिए कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) का पहला प्रयोग किया गया। लेकिन भीड़, नेटवर्क समस्या और बादलों की ऊंचाई के कारण तीन बार किए गए प्रयासों में सफलता नहीं मिल पाई।
पहले दो प्रयास नाकाम
वैज्ञानिक टीम ने विधिवत पूजा-अर्चना और हवन के साथ प्रयोग की शुरुआत की। लेकिन 400 मीटर से ऊपर बादल होने और भारी भीड़ के कारण मोबाइल नेटवर्क पर लोड बढ़ गया, जिससे GPS सही से काम नहीं कर पाया। नतीजतन, पहला ड्रोन जमीन से उठ ही नहीं सका और दूसरे प्रयास में उड़ान भरते ही झाड़ियों में फंस गया।
तीसरे प्रयास में भी बादल बने चुनौती
कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा और स्थानीय विधायक की मौजूदगी में तीसरे प्रयास में ड्रोन को 400 फीट तक उड़ाया गया। हालांकि, बादल 3 किमी की ऊंचाई पर थे और ड्रोन को वहां तक ले जाने की परमिशन न होने से क्लाउड सीडिंग नहीं हो सकी।
भीड़ ने बिगाड़ी व्यवस्थाएं
रामगढ़ बांध पर भारी भीड़ जुटने से प्रशासनिक व्यवस्थाएं चरमरा गईं। सड़कों पर जाम लग गया और वैज्ञानिकों को ड्रोन उड़ाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस को भीड़ हटाने में मशक्कत करनी पड़ी।

2 महीने चलेगा पायलट प्रोजेक्ट
किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि अमेरिका और बेंगलुरु की एक कंपनी मिलकर यह पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। शुरुआती चरण में करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से 60 क्लाउड सीडिंग टेस्ट ड्राइव होंगी। यह ट्रायल फिलहाल निशुल्क है और सफल होने पर बड़े ड्रोन के जरिए इसे आगे बढ़ाया जाएगा।